गुरुवार, 31 मार्च 2011

चिंतन का अर्थ है किसी एक विषय पर गंभीरता से गहन सोच विचार करना

चिंतन



द्वारा प्रो. सी. बी . श्रीवास्तव "विदग्ध "
ओ बी ११ , विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर , जबलपुर

चिंतन का अर्थ है किसी एक विषय पर गंभीरता से गहन सोच विचार करना . मनुष्य जो भी छोटे बड़े कार्य करता है उसके पहले उसे सोचना विचारना अवश्य पड़ता है , क्योकि प्रत्येक कार्य के भले बुरे कुछ न कुछ परिणाम अवश्य होते हैं . भले उद्देश्य को ध्यान में रखकर जो कार्य किये जाते हैं उनके परिणाम अच्छे होते हैं , तथा कर्ता को भी उनका हितलाभ होता है , किन्तु जो कार्य इसके विपरीत किये जाते हैं उनका परिणाम अहितकारी होता है और कर्ता के लिये अपयशकारी होता है . अतः नीति नियम यही है कि हर काम को करने से पहले उसकी रीति और संभावित परिणाम को ध्यान में रखकर विचार किया जावे . विचार से ही योजना बनती है , और योजना बद्ध तरीके से ही कार्य सुसंपन्न होता है . ऐसा कार्य वांछित फलदायी होता है . चोर , डाकू , लुटेरे तक सोच विचार कर दुष्टता के अनैतिक कार्य करते हैं , समझदार अन्य लोगो की तो बात ही क्या है .

चिंतन या सोचविचार का जीवन में बड़ा महत्व है . विचार से ही कर्म को जन्म मिलता है . कर्म ही परिणाम देते हैं . अतः जो जैसा काम करता है वैसा ही फल पाता है . इसीलिये कहा गया है " जो जैसी करनी करे , सो वैसो फल पाये " . परन्तु फिर भी दैनिक जीवन में बहुत से लोग विचारो को जो महत्व देना चाहिये वह नही देते . इसी से बहुत सी बातें बिगड़ती हैं . आपसी बैर भाव , विद्वेष और लड़ाई झगड़े बिना विचार के सहसा किये गये कार्यो के ही दुष्परिणाम हैं . जो व्यक्ति जितना बड़ा होता है , और उसका प्रभाव क्षेत्र जितना विशाल होता है उसके द्वारा किये गये कार्यो का प्रभाव भी उतने ही बड़े क्षेत्र पर पड़ता है . उसके कार्यो का परिणाम एक दो व्यक्ति या परिवार जनो को ही नही वरन आने वाली पीढ़ीयो तक को सदियो तक भोगना पड़ता है . हमारे देश में काश्मीर की समस्या शायद ऐसे ही बिना गंभीर चिंतन के उठाये गये कदम का दुखदायी परिणाम है .

कर्म ही मनुष्य के भाग्य का निर्माता है . व्यक्ति जैसा सोचता है , वैसा ही करता है . जो जैसा करता है वैसा ही बनता है और वैसा ही फल पाता है , जो उसके भविष्य को बनाता या बिगाड़ता है . इसीलिये कहा है , "बिना विचारे जो करे सो पीछे पछताये " . एक क्षण की बिना विचारे किये गये कार्य के द्वारा घटित की घटना न जाने कितनो के धन जन की हानि कर देती है . छोटी सी असावधानी बड़ी बड़ी दुर्घटनाओ को जन्म दे देती है और अनेको को भावी पीढ़ीयो के विनाश के लिये पछताते रहने को विवश कर जाती है .

इसलिये विचार या चिंतन को उचित महत्व दिया जाना चाहिये . सही सोच विचार से किये जाने वाले कार्यो से ही हितकर परिणामो की आशा की जा सकती है . तभी व्यक्ति , परिवार , समाज और राष्ट्र का उद्धार संभव हो सकता है . विचार ही समाज या देश के विकास या विनाश की पृष्ठभूमि तैयार करते हैं . इतिहास इसका प्रमाण है . एक नही अनेक उदाहरण हैं जहाँ शासक के उचित या अनुचित विचारो ने संबंधित देश के भविष्य को नष्ट किया या या सजाया सवांरा है . भारत के इतिहास से सम्राट अशोक इसका प्रमुख और सुस्पष्ट उदाहरण है , जिसके एक चिंतन ने कलिंग प्रदेश में प्रचण्ड युद्ध और विनाश के ताण्डव को जन्म दिया और युद्ध की विभीषिका से तंग आकर जब उसने अपने कृत्यो पर पुनर्विचार किया तो उसके नये चिंतन ने उसे शांति का अग्रदूत बनाकर बौद्ध धर्म का अनुशासित महान अप्रतिम प्रचारक बना दिया .

2 टिप्‍पणियां:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

बहुत सुन्दर आलेख, सरल शब्दों में चिंतन की महत्ता समझा दी..

Devendra Dutta Mishra ने कहा…

अति सुंदर व ज्ञानवर्धक लेख, पढ़कर अच्छा लगा । फेसबुक पर मेरा ग्रुप चिंतन नाम से है । इसपर आपका व आपके चिंतन का आमंत्रण व प्रतीक्षा है ।