सिर्फ मन की ईष्र्या
को त्यागना है।
प्रो. सी.बी. श्रीवास्तव
‘विदग्ध‘
ओ.बी. 11, एमपीईबी कालोनी
रामपुर, जबलपुर
मो. 9425484452
नाम तो है ‘पाक‘
पर नापाक हरकत
कैसी मन की अटपटी सी
भावना है?
बेवजह घुस पडोसी की
सरहदों में
मारना निर्दोषो को
क्या कामना है?
युद्धो ने तो उजाडे
कई देश पहले
आये दिन फिर युद्ध
नये क्यो ठानना है?
बचाई जा सकती कई निर्दोष
जानें
सिर्फ मन की ईष्र्या
को त्यागना है।
जरूरी है समझदारी हर
कदम पर
आदमियत के रिश्तों
को यदि पालना है।
राख कर देगी तुम्हीं
को आग जल यह
सोचो समझो खुद को अगर
उबारना है
हम तो समझते रहे हर
बार तुमको
तुम्हें अपने आपको
पहचानना है।
मिल के रहने में भलाई
है सभी की
दुनियाॅ की यह बात
दिल से मानना है।
लडाई दे जाती सबको
घाव गहरे
इससे बचने मन को बहुत
सम्हालना है।
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